सारे नेता खेलते, आज चुनावी खेल।
सत्ता के इस रूप में, द्रुपद सुता का मेल।।
द्रुपद सुता का मेल, पांडु सुत लगती जनता।
नेता शकुनी दाँव, चाल वादों की चलता।
लोक लुभावन खूब, लगाते ये हैं नारे।
चौसर बिछी बिसात, खेलते नेता सारे।१।
हांथी तीर कमान तो,कहीं हाँथ
का चिन्ह।
कमल घडी औ साइकिल,फूल
पत्तियाँ भिन्न।।
फूल पत्तियाँ भिन्न,दराती
कहीं हथोडा।
झाड़ू रही बुहार,उगा सूरज फिर
थोडा।।
देख चुनावी रंग, ढंग अपनाता
साथी।
मर्कट सा व्यवहार,करे सर्कस
का हांथी।२।
नोटा बटन दबाइये, सेवक हों
ना योग्य।
वोट उसे ही दीजिये, चुन
प्रत्याशी योग्य।।
चुन प्रत्याशी योग्य, कुशल
कर्मठ विश्वाशी।
सेवाभावी अंग, प्रशासक गुण
अनुशाशी।।
कहता सत्य पुकार,चले ना
सिक्का खोटा।
करिये सफल प्रयोग, विफल ना
होगा नोटा।३।
- सत्यनारायण सिंह

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