Sunday, 15 June 2014

खेल चौसर




ओपन बुक्स ऑनलाइन ,चित्र से काव्य तक छंदोत्सव,
अंक-३७ में मेरी रचना
 छंद - कामरूप 
   (विधान–     चार चरणप्रत्येक में 9710 मात्राओं पर यति ,चरणांत में गुरु व लघु)

शठ खेल चौसर गाँठ अवसर, चले नेता दाँव
ये गुल खिलायें जीत जायेंदिखें फिर ना गाँव।।
रवि चन्द्र तारे साक्ष सारे, सुरा सत्ता रंज
है छल कपट की कार्यशाला, खेल सुन शतरंज।१।

साइकिल हाँथी हाँथ साथी, कहीं झाड़ू गान
पत्ते रिझाते फूल भाते घडी रक्खे भान।।
मन कंज भाता सूर्य उगता, चढा तीर कमान
हर चिन्ह दलके भिन्न झलके, किन्तु चाल समान।२।

देश खातिर सुख चैन अपना, जो करे बलिदान
कुछ झांक उनमें आंक मनमें, फिर करें मतदान।।
मतदान करना फर्ज अपना, सबल हो सरकार
जन मन निखारें बन हजारे, रोध हो दमदार।३।

                                                                           -  सत्यनारायण सिंह 

No comments:

Post a Comment