Sunday, 3 August 2014

वर्षा प्रेम सुधा बरसाये


अवनी अम्बर जीव चराचर
सुख पा सब हर्षाये   
वर्षा प्रेम सुधा बरसाये
        
प्रियतम को आमंत्रित करने  
मेघ दूत बन आये   
नील गगन के मुख मंडल पर
श्वेत श्याम घन छाये
वर्षा प्रेम सुधा बरसाये

बहे पवन मदमस्त झूम के  
पुरवा मन अलसाये
प्रेम मिलन संकेत सरित ने
अर्णव संग जताये  
वर्षा प्रेम सुधा बरसाये

छैला दिनकर आज धरा से     
छिप छिप नैन लड़ाये  
प्रेम जलज बिहँसे इस जग में  
कभी न वह मुरझाये
वर्षा प्रेम सुधा बरसाये